टीनएज वर्जिन फक स्टोरी में मैंने अप्नेपदोस्में रहने वाली एक कमसिन लड़की को पटाकर उसे प्रोपोज किया. वह एकदम मान गयी. तब मैंने उसे किस करने को कहा.
यह सेक्स कहानी कुछ सालों पहले उस वक्त की है, जब मैं कॉलेज में था.
मेरा नाम संदीप है. ग्रेजुएशन पूरा करके मैं जॉब की तलाश में था.
उस वक्त मेरी नई-नई जॉब लगी ही थी कि हालात कुछ ऐसे हुए कि हमारा मकान बिक गया.
मकान बिकने के बाद मैं जिस मोहल्ले में अपनी फैमिली के साथ रहने गया, वहीं पास ही एक लड़की रहती थी.
उसका नाम नेहा था.
ये टीनएज वर्जिन फक स्टोरी मेरी और नेहा के साथ घटी एक सेक्सी घटना की है.
मैं नेहा के मोहल्ले में रहने लगा था.
जवान थे तो धीरे-धीरे हम दोनों ने एक-दूसरे को देखना शुरू कर दिया था.
नेहा थोड़ी सांवली रंगत वाली, पतली देह वाली लड़की थी.
पतली देह पर उसके उभरे हुए दूध कुछ अलग ही जलवा दिखाते थे.
यूं कहें तो वह सांवली रंगत की सनी लियोनी लगती थी.
उस वक्त वह 18 साल की हुई ही थी.
स्कूल की बड़ी क्लास में पढ़ रही थी.
मेरा ग्रेजुएशन पूरा हो चुका था.
लौड़े ने अंगड़ाई भरना शुरू कर दिया था और जल्द ही छेद की जरूरत महसूस होने लगी थी.
प्यार-मोहब्बत और सेक्स के मामले में मैं नेहा से कहीं आगे था.
जब भी मैं उसे देखता, तो मन में बस एक ही तमन्ना रहती कि साली कब आएगी मेरे लौड़े के नीचे, कब करूँगा मैं इसकी चुत की सवारी.
धीरे-धीरे मैंने नेहा से दोस्ती कर ली.
कुछ दिनों बाद मैंने उसका नंबर भी ले लिया
वह मेरे घर से सिर्फ 10 घर की दूरी पर ही रहती थी.
अब हमारी व्हाट्सएप पर बातें शुरू हो गईं.
बातें हैलो-हाय से शुरू हुईं.
कुछ दिनों में हमारी दोस्ती बहुत आगे बढ़ गई.
धीरे-धीरे कब 6 महीने बीत गए, पता ही नहीं चला.
फिर एक दिन मैंने उसे प्रपोज कर दिया.
वह मना नहीं कर पाई और उसने भी हां कह दी.
क्योंकि मैं देखने में स्मार्ट और अट्रैक्टिव था तो वह भी मुझ पर फिदा थी.
प्यार का इकरार हुआ तो हम दोनों चोरी-छिपे मार्केट में मिलने लगे.
बाजार में आकर यहां-वहां किसी दुकान में चले जाते या किसी रेस्तरां में मिल लेते.
वह बहुत भोली-भाली और सीधी-सादी लड़की थी.
एक बार हम दोनों मूवी देखने गए.
उसे मैंने बड़ी मुश्किल से मनाया था.
मूवी शुरू होने के बाद थोड़ा अंधेरा हुआ, तो मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया.
मैंने इतने दिनों में आज पहली बार उसके कंधे पर हाथ रखा था.
वह भी सिहर उठी.
उसने मुझसे अलग होने की कोशिश की पर मैंने उसे अपनी तरफ खींच कर जकड़ लिया.
सिनेमा खाली था तो आजू बाजू कोई था नहीं, जिस वजह से वह मेरी जकड़ में बनी रही.
अंधेरे का फायदा उठाकर धीरे-धीरे मैंने उसे अपनी तरफ खींचा.
वह डरी सहमी हुई थी.
फिर मैंने उसे पहली बार गले लगाया.
उस दिन कुछ और नहीं हुआ, हम अपने-अपने घर चले गए.
बातों-बातों में कुछ दिन बीत गए.
इस दौरान मैं उसे सेक्स क्लिप्स भेजने लगा था और सेक्स कहानी भी भेजने लगा था.
वह भी इस तरह की सेक्स संबंधित सामग्री से हॉट होने लगी थी.
एक दिन मैंने अचानक उसे किस करने के लिए कहा.
थोड़ा हां-ना करने के बाद उसने हां कर दी.
अब अक्सर मैं उसे यहां-वहां मिलता, हग करता और किस करता … बात लिप-किस तक ही थी.
फिर मेरे मन में बात आई कि क्यों न अब नेहा को चोदने का प्लान बनाया जाए?
मैंने सोचा, अब तो मामला गर्म हो ही गया है, तो अब कुछ भी करके चुदाई की जा सकती है … और मैं था भी कमीना.
मैंने नेहा से कहा- नेहा, कल मेरे एक दोस्त के रूम में चलोगी?
नेहा- क्यों?
मैं- अरे, उसके घर पर कोई नहीं है. हम थोड़ी देर रुक कर आ जाएंगे. अकेले साथ रहने का मौका मिल जाएगा!
नेहा हंस कर बोली- ओके … मगर कोई गलत काम तो नहीं होगा?
मैंने आंख दबा कर कहा- बिल्कुल नहीं.
नेहा समझ गई कि कुछ तो होगा ही.
वह रजामंदी देती हुई बोली- ठीक है … कितने बजे जाना है?
मैं- दस बजे सुबह चलेंगे.
नेहा- ठीक है … मेरे घर के आगे निकल कर तुम सड़क पर आ जाना, वहां तक मैं पैदल आ जाऊंगी!
मैं- ठीक है.
अब मेरा काम बन गया था.
अगली सुबह नहा-धोकर तैयार होकर मैं जल्दी से नेहा के घर के आगे निकल कर मेन सड़क पर आ गया.
नेहा ने मुझे निकलते देख लिया था.
थोड़ी देर बाद नेहा भी आ गई.
मैं उसे बाइक पर बिठा कर सीधा अपने दोस्त के घर पहुंच गया.
उसके फ्लैट पर जाते ही मेरा दोस्त बोला- भाई, मैं जा रहा हूँ, तुझे जब जाना हो, मुझे कॉल कर देना … मैं आ जाऊंगा!
उसके जाते ही मैंने गेट लॉक कर दिया.
नेहा कुछ नहीं बोल रही थी. वह सोफे पर चुपचाप बैठी हुई थी और मैं भी उसे देख रहा था.
कुछ मिनट तक मैंने भी कुछ नहीं बोला.
हम दोनों बस एक-दूसरे को देख रहे थे.
थोड़ी देर बाद हिम्मत करके मैं उठकर उसके पास गया और बगल में बैठ गया.
मैंने नेहा को खींचा.
वह मुझे देखकर डर रही थी.
मैंने उसे ज़ोर से गले लगा लिया और वह भी किस करने लगी.
मैंने आगे बढ़ कर उसे लिप-किस करना शुरू कर दिया.
पहले पहल तो वह हिचकी पर बाद में वह भी मुझे होंठों वाले चुंबन में साथ देने लगी.
मैंने उसकी जीभ को अपने मुँह में खींच लिया और जीभ का रस चूसने लगा.
वह भी मस्त होने लगी थी तो मैंने धीरे से उसके दूध को दबाना और सहलाना शुरू कर दिया.
करीब 15-20 मिनट तक उसे गर्म करने के बाद मैंने उसका दुपट्टा हटा दिया.
वह बार-बार इधर-उधर देख रही थी और कह रही थी- कोई है तो नहीं?
उसे डर सा लग रहा था क्योंकि यह सब उसके लिए एक अनजान जगह पर हो रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने किस करना बंद किया और कहा- चलो, हम अन्दर वाले रूम में चलते हैं.
वह उठी और मेरे साथ अन्दर के रूम में जाने लगी.
मैंने पूरे फ्लैट के दरवाज़े-खिड़कियां अच्छे से बंद किए और अन्दर के रूम में जाकर गेट को अन्दर से लॉक कर लिया.
अब रूम में हम दोनों ही थे.
नेहा बेड पर बैठी हुई थी.
मैं उसके पास गया और कान में धीरे से बोला- नेहा, देखो … आज इस मौके का फायदा उठाना चाहो तो उठा सकती हो. इधर हमारे पास सिर्फ़ एक घंटा है. इधर सिर्फ मैं हूँ या तुम … और कोई नहीं है.
वह झुकी हुई नज़र से चुपचाप बैठी रही.
मैंने उसका चेहरा उठाया और किस करने लगा.
किस करते-करते धीरे-धीरे मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया.
वह कुछ नहीं बोली.
इसका मतलब था कि वह चुदने को राजी थी.
मैंने सलवार को नीचे खिसकाया और उसकी चड्डी के ऊपर से ही चुत को सहलाने लगा.
वह मुझे चूमे जा रही थी और पागल हो जा रही थी.
मैंने उसके दूध पकड़ कर दबाए तो सच में उसके दूध बहुत बड़े बड़े थे.
साली पक्के में अपने हाथ से मसलती होगी.
उसका एक दूध मेरी हथेली में पूरा नहीं आ रहा था … हाथ से बाहर निकला जा रहा था.
धीरे-धीरे मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और थोड़ी देर बाद चड्डी भी.
नेहा उस वक्त बेड पर मेरे सामने पूरी नंगी लेटी हुई थी.
मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया.
मैंने पलंग पर घुटनों के बल बैठ कर लंड को सहलाया और नेहा से कहा- नेहा, पास आओ!
वह मुझे लंड सहलाती देख कर मेरे पास आ गई.
मैंने उसे पागलों की तरह किस करना शुरू कर दिया और उसकी चुत में एक उंगली करने लगा.
वह और पागल हुई जा रही थी.
कब उसने मेरे लंड को पकड़ लिया, मुझे पता ही नहीं चला.
वह मेरे लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगी.
उसकी पकड़ से ऐसा लग रहा था मानो लंड को निचोड़ ही डालेगी.
मैंने उसके कान में धीरे से कहा- मेरा लंड चूसोगी नेहा? बताओ ना … क्या तुम्हें मेरा लंड चूसना है?
उसने कहा- संदीप प्लीज़ … कुछ मत बोलो और जो करना है बस चुपचाप करते जाओ!
मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास किया.
धीरे-धीरे करके वह मेरे लंड को चूसने लगी.
थोड़ी देर के बाद लंड को मुँह से बाहर कर दिया.
मैं उठकर आस-पास देखने लगा.
मुझे कोई चिकनी क्रीम या तेल जैसी चीज चाहिए थी.
मुझे टेबल पर नारियल का तेल रखा दिखाई दिया.
मैंने अपने हाथ में ढेर सारा तेल लिया और अपने लंड पर पूरा लगा दिया.
नेहा ने देखा और बोली- ये क्या? मुझे पूरा वह सब नहीं करना.
मैंने कहा- नेहा, कुछ नहीं होगा मैं हूँ ना!
मैं कुछ देर उसकी चुत को फिर से सहलाने लगा.
वह मदहोश हो रही थी, उसकी आंखें बंद हो रही थीं.
मैं समझ गया कि अब अच्छा मौका है, देर नहीं करनी चाहिए.
मैंने उसकी सील पैक चुत में दो उंगलियां डाली ही थीं, वह आह करके सीत्कार कर उठी.
मैं बिना रुके अपनी दोनों उंगलियों को चुत में काफी देर तक अन्दर-बाहर करता रहा.
इससे उसे बहुत मज़ा आ रहा था और वह धीरे-धीरे आवाज़ निकाल रही थी.
मैंने अपना लंड उसकी चुत के पास लगाया, अपना मुँह उसके कान के पास ले गया.
मैंने उसके कान में फुसफुसा कर कहा- नेहा, क्या तुम तैयार हो?
उसने कहा- हां संदीप, मैं तैयार हूँ!
मैंने पूछा- एक झटके में पूरा डाल दूँ या धीरे-धीरे अन्दर करूँ?
उसने कहा- दर्द तो उतना ही होगा … तुम एक बार में पूरा डाल दो!
इतना सुनते ही मैंने बिना देर लगाए एक ज़ोर का झटका मारा.
मेरा लंड उसकी चुत को चीरता हुआ आधे से ज़्यादा घुस गया.
उसकी आह के साथ लौड़े ने चुत की गहराई में गोता लगा दिया.
वह चिल्ला उठी- आह्ह्ह मर गई!
मैंने उसका मुँह बंद किया और बिना रुके फिर से 4-5 झटके मारे.
नेहा के दर्द के मारे आंसू बहने लगे और चुत के छेद से खू.न बाहर आ गया.
मैं रुक गया और उसके ऊपर ही लेटा रहा.
थोड़ी देर बाद जब वह शांत हुई, मैंने अपना लंड धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू किया.
थोड़ी देर बाद उसे अच्छा लगने लगा.
मैं- नेहा, अब ठीक है?
नेहा- हां … आह्हा … आआ ठीक है … आह स्लो स्लो ही करो!
मैं- ले मेरी जान अब स्लो में मजा नहीं आएगा. जरा ज़ोर ज़ोर से ले मेरा लंड!
मैं अब पूरे जोश में आकर जोरदार चुदाई करने लगा.
नेहा भी दर्द भूल कर मजा लेने लगी और कुछ ही देर बाद तो वह अपनी गांड उछाल-उछाल कर पूरा मेरा साथ देने लगी थी.
नेहा- आह संदीप मेरी चुत दो बार पानी छोड़ चुकी है … तेरा कब निकलेगा?
मैंने कहा- निकल जाएगा … पहले चोद तो लेने दे मेरी जान!
नेहा- आह चोद मुझे आह और ज़ोर ज़ोर से पेलो … आह संदीप ज़ोर ज़ोर से चोद अपनी नेहा को आह अपनी नेहा की चुत को ज़ोर से चोद कर फाड़ दे आह संदीप! आएए … आ … आ … आ … आ … आजा आजा.
मुझे उसकी चुत की चुदाई करते-करते आधा घंटा हो चुका था.
वह भी पूरी तरह पागल हो चुकी थी.
मैंने कहा- नेहा, मेरा लंड से पानी निकलने वाला है … इसको कहां डालूँ? तेरी चुत में?
नेहा ने कहा- निकलते वक्त से बाहर निकाल लेना … चुत में मत डालना … वरना मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी संदीप!
मैं बोला- ठीक है … तो तैयार हो जाओ!
मैं फिर से ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.
करीब 20 मिनट बाद मेरा वीर्य आने ही वाला था.
मैंने लंड उसकी चुत से निकाल लिया.
नेहा ने तुरंत मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी.
थोड़ी देर बाद मैंने लंड का पानी उसके मुँह में छोड़ दिया.
नेहा का पूरा मुँह मेरे लंड के पानी से भर गया. वह सब पी गई.
थोड़ी देर हम लेटे रहे.
फिर नेहा बाथरूम गई और वापस आकर मेरे बगल में लेट गई.
मैं- नेहा, कैसा लगा?
नेहा- बहुत अच्छा!
मैं- आज से तू मेरी रंडी है तेरी चुत को मैं जब चाहूँ, जैसे चाहूँ चोदूंगा … और तुझे आना पड़ेगा!
नेहा ने हंस कर कहा- हां ठीक है संदीप, मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आया … मैं इस मज़े से अनजान थी. आज तक मुझे ये खुशी तुमने दी है संदीप … अब मेरी चुत तुम्हारी है. अब इसे चाहे जब चाहे चोदते रहना!
फिर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और घर निकल गए.
उसके बाद मैंने उसे कई बार चोदा.
कुछ दिन बाद उसकी शादी हो गई.
शादी के बाद वह कैसे मुझसे मिली … और कैसे मैंने और मेरे दोस्त पवन ने नेहा की थ्रीसम चुदाई की.
ये सेक्स कहानी मैं आपको सुनाऊं या नहीं? वह आप लोग कमेंट में बताइएगा.
और यह टीनएज वर्जिन फक स्टोरी आपको कैसी लगी?