पड़ोसन आंटी की चुत चोदी

आंटी की चूत चोदी कहानी में मैं पड़ोस की सेक्सी आंटी को देख कर मुठ मारा करता था. एक बार मैं उनके घर गया. वे बाथरूम में नंगी नहा रही थी.

दोस्तो नमस्कार, मेरा नाम रवि है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ.

मैं हिंदी सेक्स कहानियों का पाठक हूँ और मैं हर रोज़ कहानियाँ पढ़ता हूँ और मुझे आंटी कहानियाँ बहुत पसंद हैं.

ऐसी ही एक कहानी मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ, यह मेरी पहली कहानी है।

ये आंटी की चूत चोदी कहानी मेरे और मेरी पड़ोसन आंटी के साथ सेक्स की है.

यह बात एक साल पहले की है.
तब मैं 12वीं क्लास के एग्ज़ाम देकर फ्री हो गया था.

उस समय मैं घर पर पूरा दिन फ्री रहता था.
मेरे मम्मी-पापा काम पर चले जाते थे और मॉम टीचर थीं इसलिए वे बहुत देर से घर आती थीं.

मैं बस सारा दिन मोबाइल पर सेक्स वीडियोज़ देखता रहता था और मुठ मार कर खुद को ठंडा कर लेता था.
फ्री होने की वजह से मैं पड़ोस के घरों में भी आता-जाता रहता था.

मेरी पड़ोसन आंटी एक मस्त माल थीं.
उनका भरा-पूरा शरीर, गदराई हुई गांड थी. वे एकदम सेक्स की मूरत थीं.
उन्हें देख कर मन करता था कि बस जहां मौका मिले, आंटी को लिटा कर चोद दूँ.

मुझे बस किसी भी तरह आंटी को चोदना था.
आंटी के घर में भी कोई नहीं होता था.
किसी तरह मुझे मालूम चल गया था कि आंटी भी सेक्सी वीडियोज़ देखती हैं.

आंटी की उम्र करीब 40 साल की थी और उनकी बेटी, जो अभी 19 साल के आस-पास की थी.
बाद में उसे भी मैंने चोदा था.
वह सेक्स कहानी मैं बाद में बताऊंगा.

मैं एक दिन आंटी के घर गया.
उस दिन आंटी के घर पर कोई नहीं था.

वे नहा रही थीं.

मैंने आवाज़ लगाई, तो आंटी बोलीं- अन्दर आकर बैठ जाओ, मैं अभी आती हूँ.
मैं अन्दर चला गया.

मैंने ध्यान दिया कि बाथरूम में पानी गिरने की आवाज आ रही है तो मैं समझ गया कि आंटी नहा रही हैं.
मैं बाथरूम के दरवाज़े के करीब जाकर आंटी को झांक कर देखने लगा.

उनके बाथरूम का दरवाजा पूरा नहीं लगता था तो उसकी झिरी में से अन्दर का नजारा दिखाई दे रहा था.

मैंने अन्दर देखा तो एकदम हैरान रह गया.
आंटी नंगी थीं और मस्त रांड सी लग रही थीं.
वे अपने दूध दबा रही थीं और आह आह कर रही थीं.

उनके ऊपर शॉवर से पानी टपक रहा था, तो बड़ी ही मदहोश कर देने वाला दृश्य दिख रहा था.

मुझसे रहा नहीं गया.
मेरा लंड एकदम कड़क हो चुका था.
मेरा दिल कर रहा था कि अभी अन्दर घुस जाऊं और आंटी को चोद डालूँ.

लेकिन जो घटना होने वाली थी, उसका मुझे क्या पता था कि आज मेरा दिन बनने वाला है.

मैंने लंड बाहर निकाल कर मुठ मारना शुरू कर दिया.
मुझ पर नंगी आंटी को देख कर वासना चढ़ी हुई थी.

बाथरूम के अन्दर आंटी भी कामुक भाव से अपने दूध दबा रही थीं और आवाज निकाल रही थीं.

उन्हें देख कर मैं बिंदास होकर मज़े से मुठ मार रहा था.
मेरी दोनों आंखें बंद हो गईं.

मैं भूल गया कि मैं कहां हूँ.

बस अपने दिमाग़ में मज़े में आंटी को चोदने की कल्पना करता हुआ आंटी की ले रहा था.
तभी आंटी ने मुझे लंड हिलाते हुए देख लिया और आवाज लगाई.

‘ये क्या कर रहे हो?’ एक कड़क आवाज आई तो मैंने आंखें खोलीं.

आंटी बाहर आ गई थीं.
उन्होंने मुझे हल्का-सा थप्पड़ मार दिया.
मैं सकपका गया.

आंटी- ये क्या कर रहे हो? तुझे शर्म नहीं आई?
मैं- क..कुछ नहीं आंटी!

मेरी आवाज़ नहीं निकल रही थी लेकिन मेरा हाथ अभी भी मेरे लंड पर धीरे-धीरे चल रहा था.

आंटी- आ जाने दो, तुम्हारी मम्मी को बताती हूँ तेरे बारे में!

मैं न जाने किस झौंक में उस वक्त भी अपने लंड को पकड़ कर सहलाता जा रहा था.
मैं अपने लौड़े को मुठियाता हुआ बोला- प्लीज़ आंटी ऐसा मत कीजिए!

आंटी- तुम्हें शर्म नहीं? तू अभी भी मुठ मार रहा है!
मैं- आंटी सॉरी … आप हो ही इतनी सुंदर कि मुझसे रहा नहीं जाता!
आंटी- अन्दर डालो इसे … जिप बंद करो बदमाश!

मैंने हिम्मत की और आंटी के एकदम पास आ गया.
मैंने आंटी को बांहों में भर लिया.

वे कुछ नहीं बोलीं.

उस वक्त हम एक-दूसरे की सांसों को महसूस कर रहे थे.

आंटी धीमे से बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैं- आई लव यू आंटी, प्लीज़ मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ, सच में!

आंटी मेरे हाथों से छूटने की कोशिश करती हुई बोलीं- अरे छोड़ो न … ये कोई उम्र है प्यार की? मैं 40 साल की हूँ!

मैं- मुझे आप अभी भी पसंद हो मेरी जान!
मैंने इतना कहते ही उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

क्या मज़ा था … आंटी मुझसे खुद कोई छुड़वाने की कोशिश करने में लगी जरूर थीं लेकिन उनकी कोशिश कुछ ऐसी लग रही थी मानो वे खुद ही मेरे साथ लगना चाहती हों.

आंटी- नहीं, रवि प्लीज छोड़ो मुझे … आह्हा … मत करो न!

मैंने अपनी पकड़ और मजबूत की और उन्हें हॉल में पड़े सोफे पर गिरा दिया.
वे धम्म से गिरीं और मैं उन्हें बिना कोई मौका दिए उनके ऊपर चढ़ गया.

मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.

कुछ देर बाद वे मुझे देखती हुई बोलीं- तो तुम नहीं मानोगे?

मैंने हंस कर उनके गाल पर चुम्मी ली और कहा- कैसे मान जाऊं … आप तो एकदम मलाई हो!
आंटी मेरी बात पर हंस दीं और अब वे भी मेरा साथ देने लगीं.

मैंने उनके दूध को पकड़ कर मसला.
आंटी मेरे हाथ का मज़े लेती हुई बोलीं- प्लीज़ … ऐसा मत करो रवि … लगती है न … चलो अच्छा रुको हम दोनों साथ में मज़े लेते हैं!

उन्होंने यह कहा तो मैं समझ गया कि आंटी की चुदास जाग गई है.

मैंने कहा- हां यार आप भी बाथरूम में अपने दूध अपने हाथ से दबा रही थीं, उससे क्या मजा आना था. मुझसे दबवाओ न!

यह सुनकर आंटी हंस दीं और अब वे मेरा पूरा साथ देने लगीं.
करीब 20 मिनट तक हम दोनों किस करते रहे.

आंटी- अगर प्यार ही करते हो तो ज़बरदस्ती क्यों की? प्यार से कहना था न!
मैं बोला- ओके आई लव यू जान!
आंटी- चलो अब बेडरूम में अन्दर चलते हैं … मैं गेट लॉक करके आती हूँ.

हम दोनों बेडरूम में आ गए.
वहां जाकर मैंने आंटी को फिर से किस करना शुरू किया.

लगातार 15 मिनट तक किस होता रहा … हमें पता ही नहीं चला कि हम दोनों चुम्मियां करते करते कब नंगे हो गए थे.

मैंने आंटी के एक दूध पर मुँह लगाया और निप्पल को पकड़ कर खींचा.

आंटी मज़े में ‘आह्हा … अह्ह्हा …’ करने लगीं.
काफी देर तक आंटी ने मुझे अपने दोनों दूध चुसवाए … उसके बाद वे मेरे लंड के साथ खेलने लगीं.

मैंने कहा तो वे मेरा लंड चूसने लगीं.
सच में लंड चुसवाने में मुझे बेहद सनसनी हो रही थी और आंटी भी पूरी निपुणता से लौड़े को चूस रही थीं, बीच बीच में वे मेरे टट्टों को भी सहला रही थीं.

मैंने उनसे कहा कि मुझे भी चुत चूसना है.
वे हंस दीं और हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए.

उनकी जामुनी रंग की चुत एकदम चिकनी थी उस पर झांट का एक बाल भी नहीं था.

मैं जीभ से उनकी चुत को मस्ती से चाटने लगा था तो आंटी ने अपनी टांगों को एकदम से खोल कर फैला दिया था.

उनकी चुत से रस टपकने लगा था और नीचे मेरे लौड़े को चूसे जाने से मेरे अन्दर भी उत्तेजना चरम पर आ गई थी.
अब मुझसे रहा नहीं गया.

मैं कहा- अब चोद दूँ आंटी!
आंटी बोलीं- हां, अब अपना लंड जल्दी से मेरी चुत में डाल दो मेरी जान!

मैंने आंटी को बेड पर सीधा लिटाया और लंड को चुत के छेद पर रगड़ने लगा.
आंटी मस्त हो रही थीं ‘आह्ह्हा … हाह्ह्हा …’

उनकी कामुक आवाज़ से मैं भी मदहोश होने लगा था.

वे आह आह की आवाज के साथ अपने हाथ से चुत के छेद पर लौड़े को सैट करने लगीं.
सुपारे ने ज्यों ही छेद की गर्मी का अहसास किया, तभी मैंने ज़ोर का झटका दे मारा.

आंटी की चुत में अभी आधा लंड गया ही था कि वे ज़ोर से चिल्ला उठीं- आह मर गई … धीरे चोद साले … ऐसे कौन पेलता है?

मैं बोला- लगता है काफी दिनों से आपकी चुदाई नहीं हुई जान … इसलिए आपकी चुत का छेद सिकुड़ गया है.
वे बोलीं- हां और तुम्हारा लंड भी अंकल के लौड़े से काफी बड़ा है … तुम्हारे अंकल का लंड तुमसे आधा ही होगा.

मैंने आंटी की बकचोदी को नजरअंदाज किया और उनके होंठों में होंठ डालकर झटके देने लगा.
दो तीन धक्कों में ही मैंने पूरा लंड चुत के अन्दर घुसेड़ दिया.

आंटी खूब मस्ती भरी आवाज़ कर रही थीं- आह्हा … अह्ह्हा … उच्च … आह्ह्हा और ज़ोर से लव यू … मज़ा आ रहा है … और ज़ोर से चोदो जानू!

आंटी की मादक आवाजें मुझे और जोश में लाती जा रही थीं.
कुछ देर बाद आंटी बोलीं- अब मुझे ऊपर आने दो.

मैंने ओके कहा और लंड चुत में फंसाए हुए ही पलट गया.
वे मेरे ऊपर आ गईं.

उन्होंने मुझे एक बार चूमा और अपनी कमर को हिलाना चालू कर दिया.
वे मेरे लौड़े पर ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थीं. उनके बूब्स तो कमाल ही कर रहे थे.

गजब नज़ारा था … उनके दूध कंधों तक जाकर नीचे आ रहे थे.
आंटी जिस तरह की मादक आवाज़ कर रही थीं, वे आवाजें मुझे पागल बना रही थीं.

लौड़े की सवारी करते-करते आंटी ने पानी छोड़ दिया और वे हांफ कर मेरे सीने पर ढह गईं.
फिर धीरे से सरक कर लंड से नीचे उतर गईं.

हम दोनों ने किस किया. मैं अभी झड़ा नहीं था.

वे पलट गईं तो मैंने उनकी गांड के छेद पर लंड लगा दिया.
आंटी ने मना कर दिया और वे कहने लगीं- आगे की जितनी मर्ज़ी चोद लो, लेकिन गांड में नहीं लूँगी.

मैं फिर से उनकी चुत में लंड डालने लगा.
आंटी चुदाई के लिए वापस तैयार हो गई थीं.

मैं लौड़ा पेल कर धकापेल चोदने लगा.
आंटी मज़े से ‘आह्हा … अह्ह्हा … अह्ह्ह’ करने लगीं.

कुछ देर बाद मेरा काम तमाम होने ही वाला था, तो मुझे याद आया कि आंटी से पूछ तो लूं!

मैंने उनसे पूछा- वीर्य कहां निकालूँ?
आंटी बोलीं- अन्दर ही छोड़ दे, मेरी प्यास को बुझा दे.

कुछ आखिरी तेज झटकों के साथ मैं आंटी की छेद में झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया.

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे.
थकान हो गई थी तो हम दोनों की नींद लग गई.

हम ऐसे ही एक दूसरे से चिपके आराम करते रहे.
करीब एक घंटा बाद नींद खुली तो देखा कि दोपहर के 2:30 बज रहे थे.

आंटी बोलीं- अरे काफी देर हो गई, उठो … पौने चार बजे मेरी बेटी आ जाएगी.
मैं उनके ऊपर से हट गया.

आंटी बेड से उतर कर कपड़े उठाने लगीं.
मैंने आंटी को पकड़ा, उनके हाथ से कपड़े छीन कर फेंक दिए.
वे मुझे सवालिया नजरों से देखने लगीं.

मैंने कहा- अरे यार हमारे पास अभी काफी वक़्त है मेरी जान!

आंटी हंस दीं और मेरी तरफ देख कर कामुक मुस्कान देने लगीं.
उन्होंने मेरे खड़े लंड की तरफ देखा और बोलीं- तुम्हारे साथ सेक्स करने में सच में बहुत मज़ा आया. आज से मैं तुम्हारी हूँ.

यह कह कर आंटी मुझे किस करने लगीं.

कुछ देर किस करने के बाद मैंने उन्हें रोका और बेड की दराज में से सिंदूर की डिब्बी को उठा कर आंटी की मांग में भर दिया.
मैंने कहा- आई लव यू आंटी … मैं आपको कभी नहीं छोड़ूँगा!

आंटी भी प्यार से बोलीं- आज से मैं तुम्हारी हूँ रवि, लेकिन तुम मुझे आंटी मत बोलो प्लीज.
मैंने कहा- ओके जान आई लव यू!

हम दोनों फिर से किस करने लगे.
उस वक्त आंटी नंगी ही थीं.

वे किचन में गईं और पानी लेकर आईं.
वे मुझे गिलास पकड़ाती हुई बोलीं- मैं कुछ खाने को लाती हूँ!

मैंने बोला- कुछ नहीं खाना, रहने दो.
वे बोलीं- चलो केक रखा है, वह लाती हूँ.

वे नंगी ही किचन में गईं और उधर फ्रिज से केक ले आईं.
हम एक-दूसरे को खिलाने लगे.

तभी मेरे दिमाग में आईडिया आया.
मैंने केक की क्रीम आंटी की चूचियों पर लगा दी और एक निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
आंटी फिर से मस्त हो गईं.

उन्होंने अपनी केक से लिपड़ी हुई उंगली मेरे मुँह में दे दी, जिसे मैं प्यार से चूसने लगा था.
बूब्स चूसने के बाद मैंने केक चुत पर लगा दिया.

इससे वे तड़प उठीं और उछलने लगीं.
फ्रिज का ठंडा केक चुत पर इतना स्वादिष्ट लग रहा था कि क्या बताऊं.

आंटी भी मेरा लंड दबाने लगीं.

थोड़ी देर में उन्होंने पानी छोड़ दिया.

फिर वे मेरे लंड पर भी केक की क्रीम लगा कर वही सब करने लगीं.

उनके चूसने से मेरा लंड तैयार हो चुका था.

आंटी बोलीं- प्लीज़ अब जल्दी से चोद दो … वर्ना कोई आ जाएगा.
मैंने कहा- ओके मेरी जान.

मैंने आंटी की चुत पर लंड रखा और झटका दे मारा.
मेरा पूरा लंड चुत के अन्दर चला गया.

इस बार आंटी इतना नहीं चिल्लाईं, वे बस ‘आह … आह … ‘ करने लगीं.
चुदाई का मस्त मजा आने लगा.

धकापेल करते-करते हमें समय का पता ही नहीं चला. हम दोनों तो बस चुदाई में मगन थे.
पूरा कमरा आवाज़ों से गूँज रहा था.

अचानक डोरबेल बज गई.
तभी आंटी घबरा कर बोलीं- अरे मर गई … लगता है मेरी बेटी आ गई है. शिट यार, मज़ा बीच में रह गया … चलो जल्दी से उठ कर पीछे से निकल जाओ … आई लव यू!

हम दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने.
आंटी ने गेट खोला.

मैं पिछले दरवाज़े से घर आ गया.

उसी शाम को हम दोनों ने अपनी दिन वाली चुदाई पूरी कर ली थी.

उस रात मैंने एक बार और आंटी की चूत चोदी.
अगले दिन सुबह में अपने घर आ गया.

इसके बाद हर रोज़ मैं आंटी के पास जाता. सुबह 9 से 10 बजे तक हम दोनों घर में नंगे ही रहते.

बाद में मेरी जबरदस्त मांग पर आंटी ने खुद ही गांड भी मरवाई.

उसके बाद मैंने एक दिन उनकी बेटी को भी चोदा क्योंकि वह एक दिन खुद ही नंगी होकर मेरे सामने आ गई थी और कहने लगी थी- मुझे भी चोदो नहीं तो मैं तुम्हारे घर पर कह दूँगी.

यह सब कैसे हुआ था, उसकी सेक्स कहानी में आगे बताऊंगा.
आंटी की चूत चोदी कहानी पर आप अपने comment जरूर भेजें.

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