यह एक नई हिंदी कहानी है जो real life अनुभव पर आधारित है। अगर आपको हिंदी कहानी पढ़ना पसंद है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।
हॉट चाची चुदाई कहानी में मैं अपने घर में चची की चूचियों को देखा करता था. उन्हें नंगी नहाती भी देखता था. उनको भी यह बात मालूम थी पर वे कुछ नहीं कहती थी.
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दोस्तो,
मेरा नाम राज है, उम्र 23 साल.
मेरे लंड का साइज़ काफी मस्त है. यह 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा एक ऐसा लंड है जो किसी भी औरत या लड़की की चीखें निकाल सकता है.
यह सेक्स हिंदी कहानी आज से 3 साल पहले की है और ये एक सच्ची घटना है.
मेरी इस हॉट चाची चुदाई कहानी की नायिका हैं अंजलि चाची.
उनकी उम्र 34 साल है.
उनके 32 इंच के रसभरे बोबे, 28 की पतली कमर और 34 की उठी हुई गांड को जो कोई भी एक बार देख लेगा, तो मेरा दावा है कि वह मुठ मारे बिना नहीं रह पाएगा.
यह उस समय की बात है जब हमारे घर में स्नानघर नहीं हुआ करता था.
जब चाची बड़े गले का ब्लाउज़ पहन कर काम के लिए नीचे झुकती थीं तो उनके बड़े-बड़े दूध मेरी आंखों के सामने आ जाते थे.
मैं उन्हें घूर-घूरकर देखता रहता और ये बात चाची अच्छी तरह जानती थीं.
उनके रसभरे दूध देखने के बाद मुझे चाची की चुदाई का भूत सवार हो गया था.
जब वे स्नान करने खुले आंगन में बैठ जातीं, तो मैं भी उनके पास बैठकर बातें करने लगता.
मैं अपने फोन में गेम खेलने का बहाना बनाते हुए उनकी नहाते हुए वीडियो बना लेता. उस वीडियो में चाची के दूध मस्त दिखते थे.
उन वीडियोज़ में मैं उनके दूध और गांड देख-देखकर कई कई बार मुठ मारता रहता.
ये सब मेरा रोज़ का रूटीन बन गया था.
धीरे-धीरे मैं चाची को खुश करने और रिझाने का हर काम करने लगा.
चाची जो भी काम बोलतीं, मैं फटाफट कर देता.
इसी बीच मैंने एक कंप्यूटर लिया, तो रात को कंप्यूटर चलाता रहता था, उसमें ब्लू-फिल्म देखता रहता था.
एक दिन चाची ने कहा- मुझे भी चलाना है.
मैंने पहले से ही पोर्न साइट खोल रखी थी और किसी काम से अपने कंप्यूटर को खुला छोड़ कर बाहर चला गया था.
उसी वक्त चाची मेरे कमरे में आ गईं और जैसे ही चाची ने कंप्यूटर की स्क्रीन देखी, तो वे चुदाई की फिल्म को देखती ही रह गईं.
उसी समय मैं अचानक से अपने कमरे में आ गया.
तो चाची घबरा कर भागीं और बाहर चली गईं.
इधर मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि स्थिति को कैसे हैंडल करूँ. कहीं चाची किसी से कुछ कह न दें.
अगले दिन जब चाची मेरे पास आकर बैठीं, तो वे मुस्कुरा रही थीं.
उनकी मुस्कान देख कर मेरा भय खत्म हो गया और मैं कंप्यूटर चलाने के बहाने उन्हें छूने लगा.
अब मुझे तो किसी भी हाल में चाची को चोदना ही था, तो मैं हर वह तरीका सोचता रहता था … जिसके जरिए चाची को अपने लौड़े के नीचे ले पाता.
पर मेरा कोई भी काम नहीं आ रहा था.
एकदम से चाची को पकड़ लेने में मेरी गांड फट रही थी और उनकी तरफ से सिवाए मुस्कान के कुछ और नजर नहीं आ रहा था.
आपको बता दूँ कि मैं फ्री सेक्सी स्टोरीज़ का नियमित पाठक हूँ. उसी में से एक सेक्स स्टोरी से मुझे आइडिया मिला.
उस कहानी में बताया गया था कि रात को हिम्मत करके चाची की चूत में उंगली डाल दी गई थी, तो काम बन गया था.
मैंने भी वैसा ही करने का फैसला किया.
मेरे नसीब से दो दिन बाद पूरे परिवार वाले एक हफ्ते के लिए बाहर जाने वाले थे.
मेरे अंकल तो ज्यादातर समय बाहर ही रहते हैं, वे चाची की चुदाई की प्यास को कभी नहीं बुझा पाते हैं, यह मुझे बाद में मालूम चला था.
उस दिन चाची मेरे साथ घर पर अकेली रह गई थीं.
आज तो मेरी किस्मत ही खुल गई थी.
मैं मन-ही-मन चाची की चुदाई के सपने देखने लगा.
सब लोगों के जाने के बाद चाची ने खाना बनाया और हम दोनों ने साथ में बैठकर खाया.
आज मुझे चाची की आंखों में साफ़ हवस दिख रही थी.
उनकी वासना भरी आंखों को देखते ही मेरा 9 इंच का लंड खड़ा हो गया.
चाची ने भी ये सब देख लिया था.
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खाना खाकर हम दोनों सोने की तैयारी करने लगे.
मैं अपने कमरे की तरफ़ जाने लगा तो चाची ने कहा- मुझे अकेले में डर लगता है, तुम यहीं सो जाओ.
ये सुनकर मैं तो एकदम से खुश हो गया.
अब मैं और चाची एक ही बिस्तर पर सो गए.
उन दिनों गर्मी का मौसम था, तो कम्बल की ज़रूरत ही नहीं थी.
चूंकि मैं जोधपुर के पास के एक गांव से हूँ और आपको तो पता ही है कि गांव में महिलाएं घाघरा और ब्लाउज़ पहनती हैं.
उस रात को हम दोनों ही सो गए थे.
करीब 12 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने धीरे-धीरे चाची का घाघरा घुटनों से पेट की तरफ़ ऊपर ले जाना शुरू कर दिया.
थोड़ी ही देर में चाची नीचे से पूरी नंगी हो गईं.
चाची जाग गई थीं, पर वे नींद का नाटक करके सोई रहीं.
मेरा लंड उफान मार रहा था.
मैंने देखा कि चाची की चूत पर एक भी बाल नहीं था.
तो मैं समझ गया कि आज चाची ने मैदान की घास छील कर पिच को मैच के लिए रेडी किया हुआ है.
मतलब आग दोनों तरफ़ से लगी हुई है.
मैंने हिम्मत करके अपनी एक उंगली चाची की चूत में डाली.
चाची की चूत पहले से ही गीली थी.
उंगली ने एकदम से चुत के अन्दर घुस कर गर्मी का मुआयना किया.
तभी चाची की कसमसाहट हुई तो मैंने अपनी उंगली झट से चुत से बाहर निकाली और अपने मुँह में डाल ली.
आह क्या मस्त स्वाद था … बता नहीं सकता.
कुछ देर बाद मैंने अपनी दो उंगलियां चाची की चुत में डालीं और अन्दर-बाहर करने लगा.
चाची सोने का नाटक कर रही थीं, पर उन्हें भी अपनी चुत में उंगली करवाने में पूरा मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने खुद को चुदाई की पोजीशन में सैट किया और जैसे ही अपना लंड चाची की चूत पर रखा, चाची जाग गईं.
वे कहने लगीं- यह क्या कर रहा है!
मैं सकपका गया कि यह क्या बवाल हुआ!
वे बोलीं- कल तेरी मम्मी को बोलती हूँ!
यह सुनकर मेरी तो समझो गांड फट गई.
हालांकि उन्होंने मेरी मम्मी को तो कुछ नहीं कहा क्योंकि उन्हें भी चुदना था.
पर इतना जरूर हुआ कि चाची ने मुझसे 2 दिन बात नहीं की.
फिर तीसरे दिन की बात है.
चूंकि मेरे घर के सभी लोग तो एक हफ्ते के लिए शादी में गए थे, तो घर पर सिर्फ़ मैं और चाची ही थे.
शाम का खाना खाते समय चाची बोलीं- सॉरी, मुझे गुस्सा नहीं करना चाहिए था.
मैं कुछ नहीं बोला.
चाची ने कहा- आज जो तुम बोलोगे, वह करूँगी.
मैंने कहा- ठीक है.
चाची बोलीं- बोल, तुझे क्या करना है? मना नहीं करूँगी!
मैंने उन्हें देखा और साफ शब्दों में कहा- आपकी चुदाई करनी है.
चाची बोलीं- ठीक है, आज शाम को पक्का.
शाम को मैं मेडिकल पर सामान लेने गया.
जब घर लौटा, तो देखा कि चाची शादी की ड्रेस में दुल्हन बनकर बैठी हैं.
मैंने सीधे जाकर चाची को अपनी बांहों में भर लिया.
आह क्या मस्त अहसास हुआ … बता नहीं सकता.
मैंने चाची को किस करना शुरू कर दिया.
वे भी साथ देने लगीं.
करीब दस मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही चूमते रहे.
फिर मैंने अपने एक हाथ से उनके दूध को दबाना शुरू किया.
चाची के मुँह से ‘आह … आ … स्स्स … ओह.’ जैसी आवाज़ें निकलने लगीं.
मैंने उनकी ब्रा उतार कर मम्मों को आज़ाद कर दिया.
सच में चाची के दूध बड़े ही मस्त थे. एकदम सफ़ेद मलाई जैसे … मैंने एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.
किस करते-करते कब दोनों नंगे हो गए, पता ही नहीं चला.
अब मैंने चूत पर किस करना शुरू कर दिया.
चाची बिना पानी की मछली की तरह तड़पने लगीं, उनके मुँह से मदहोश करने वाली आवाज़ें निकलने लगीं ‘ओह … मेरी जान और ज़ोर से … अह … अह … स्स्स्स्स!’
वे अपने हाथ से मेरे सिर को चूत में दबाने लगीं.
बस 5 मिनट में उन्होंने पानी छोड़ दिया मैंने पूरा पानी पी लिया.
उनकी चुत का रस मस्त था और उसका स्वाद किसी अमृत से कम नहीं था.
अब मैंने अपना लंड निकाला.
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चाची मेरे लंबे लौड़े को देखती ही रह गईं और बुदबुदाने लगीं ‘बाप रे इतना बड़ा? तेरे अंकल का तो इससे आधा भी नहीं है, मैं नहीं ले सकती!’
मैंने समझाया- पहली बार थोड़ा दर्द होगा, बाद में बहुत मज़ा आएगा. आप इसे हाथ से पकड़ो तो सही!
चाची मेरे लौड़े को अपने हाथ से सहलाने लगीं.
कुछ देर बाद चाची ने बिना कहे मेरे लंड को मुँह में ले लिया.
बहुत मुश्किल से उनके मुँह में मेरा लंड जा पाया था.
जब चाची को मजा आने लगा तो आह वे मेरे लवड़े को ऐसे चूसने लगी थीं मानो वे कोई पेशेवर रंडी हों.
करीब 10 मिनट तक चाची मेरे लौड़े को चूसती रहीं.
आखिरकार मेरे लंड ने उनके मुँह में ही वीर्य निकाल दिया.
चाची ने एक भी बूंद बाहर नहीं गिरने दी, वे सारा माल चट कर गईं.
मुझे तो ऐसा लगा जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गया हूँ.
मैंने उनके एक दूध को मसल कर कहा- गजब लंड चूसती हो यार चाची!
चाची मेरे लौड़े को चाटती हुई बोलीं- बार-बार चाची मत बोल, आज से मुझे अनु जान कहकर बुला … मैं तेरी पर्सनल रंडी हूँ.
मैंने भी ओके कह दिया.
अगले दस मिनट तक चाची मेरे मुरझाए लौड़े को चूसती रहीं.
तो मेरा लंड वापस कड़क होकर चुत चोदने के लिए तैयार हो गया.
अब तो चाची भी बेकरार थीं.
उनकी चुत बजाने का टाइम आ गया था.
वे बोलीं- बेबी … और मत तड़पा … अब अपना लंड डालकर मेरी चूत की प्यास बुझा दे.
मैंने उन्हें चुदाई की पोजीशन में लिटाया और उनकी चुत में लंड पेलने लगा.
जैसे ही मेरा आधा लंड उनकी चुत में अन्दर गया तो चाची दर्द से चीख उठीं ‘आह मर गई आह बाहर निकाल साले कुत्ते हरामी … आह फट गई मेरी!’
मैंने उनकी एक न सुनी और एक ज़ोरदार झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.
उनकी आंखों से आंसू आने लगे.
मैं बिना रुके चुदाई करता रहा.
थोड़ी देर बाद उन्हें भी मज़ा आने लगा.
हमारी चुदाई पूरे 30 मिनट तक धकापेल चली.
आखिर में मैंने अपना रस उनकी चूत में डाला और थक कर उनके ऊपर ही सो गया.
उस रात मैंने चाची को सुबह 4 बजे तक बार बार चोदा.
इसके बाद 2 साल तक मैं रोज़ चाची को चुदाई करता रहा.
उनको मैंने एक बच्चा भी दिया है.
दोस्तो, यह मेरी सच्ची हॉट चाची चुदाई कहानी है आपको कैसी लगी?
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